वर्ष प्रतिपदा
भारतीय कालगणना का आधार है। इसी तिथि से राज्याभिषेक, सामाजिक आयोजन और नए कार्यों का शुभारंभ किया जाता रहा है। यह दिवस भारतीय समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है।
वर्ष प्रतिपदा, जिसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार नव वर्ष का प्रथम दिवस है। यह दिन केवल कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और चेतना के नव जागरण का प्रतीक है। यही दिवस विक्रम संवत का शुभारंभ करता है, जिसकी स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी।
वर्ष प्रतिपदा का आगमन वसंत ऋतु के साथ होता है, जब प्रकृति स्वयं नवजीवन से भर उठती है। वृक्षों में नई कोंपलें वातावरण में शुद्धता मानव जीवन में नव ऊर्जा यह दिवस प्रकृति और मानव जीवन के संतुलन का प्रतीक है।
शास्त्रों के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का आरंभ किया। अनेक धार्मिक ग्रंथों में वर्ष प्रतिपदा को सृष्टि आरंभ दिवस के रूप में स्वीकार किया गया है। इस दिन घरों में पूजन, ध्वज स्थापना, मंगल कलश एवं धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
नव वर्ष चेतना समिति वर्ष प्रतिपदा को हिंदू चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक जागरूकता के रूप में समाज तक पहुँचाने हेतु कार्यरत है।